भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया नॉर्वे दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत को लेकर चर्चा छिड़ गई। यह मुद्दा तब उठा जब उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया। एक नॉर्वेजियन पत्रकार ने इस पर सवाल उठाया कि नॉर्वे में खुली प्रेस बातचीत आम परंपरा है। बाद में यह मुद्दा विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में भी सामने आया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करता है और भारतीय संविधान प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की गारंटी देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर देश के मीडिया से संवाद के अपने अलग तरीके और प्रक्रियाएं होती हैं। वहीं, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने भी इस बात का समर्थन किया कि अलग-अलग देशों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया इंटरैक्शन को लेकर अलग-अलग परंपराएं होती हैं और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, यह मामला वैश्विक स्तर पर मीडिया स्वतंत्रता और राजनीतिक संचार के तरीकों को लेकर बहस को फिर से उजागर करता है। जहां एक ओर पारदर्शिता और खुली बातचीत को लोकतंत्र का अहम हिस्सा माना जाता है, वहीं दूसरी ओर देशों की अपनी कार्यशैली और परंपराओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।