कर्नाटक सरकार ने 37 साल के लंबे अंतराल के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव दोबारा कराने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य कैबिनेट ने लिया है। 1989 में कैंपस हिंसा और छात्र गुटों के बीच झड़पों के बाद इन चुनावों पर रोक लगा दी गई थी।
सरकार के मुताबिक, पहले चरण में सभी डिग्री और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव कराए जा सकते हैं। छात्र संघ में अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, महासचिव, दो संयुक्त सचिव और छह कार्यकारी सदस्यों समेत कुल 12 पद होंगे। इनमें कुछ पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।
हालांकि, चुनाव राजनीतिक दलों से संबद्ध छात्र संगठनों के बैनर तले नहीं लड़े जा सकेंगे। राजनीतिक छात्र संगठनों के सदस्य व्यक्तिगत रूप से चुनाव लड़ सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों में नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देना है, जबकि कैंपस के राजनीतिकरण से बचना भी प्राथमिकता रहेगी।

