मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल की कीमतों में इस तेजी का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। बढ़ते आयात खर्च ने भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है।
तेल की महंगाई से भारत का आयात बिल बढ़ने और व्यापार घाटा बढ़ने की चिंता भी गहरा गई है। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जबकि रुपये पर और दबाव पड़ सकता है। बाजार में निवेशकों की नजर अब वैश्विक तेल कीमतों और मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत की महंगाई, चालू खाते और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में रुपये की स्थिरता बनाए रखना भारतीय नीति निर्माताओं के लिए एक अहम चुनौती बन गया है।

