नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रस्तावित FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) संशोधनों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने इन बदलावों की व्यापक समीक्षा के लिए मामले को संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है। रियो का कहना है कि विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में किसी भी बड़े बदलाव का असर सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और मानवीय कार्यों से जुड़े संगठनों पर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि प्रस्तावित संशोधनों पर विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श किया जाए और संसद की उचित प्रक्रिया के तहत इनका विस्तृत परीक्षण हो। नागालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में कई संगठन सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता से जुड़े कार्यों के लिए विदेशी योगदान का उपयोग करते हैं। ऐसे में नियमों में बदलाव से इन संगठनों की गतिविधियों और वित्तीय संचालन पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
FCRA भारत में विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियम और निगरानी व्यवस्था तय करता है। केंद्र सरकार की ओर से इसके प्रावधानों में बदलाव का उद्देश्य विदेशी योगदान में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना बताया जाता है, जबकि आलोचक इसके संभावित प्रशासनिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब नागालैंड सरकार की मांग के बाद इस मुद्दे पर संसद और केंद्र सरकार के स्तर पर आगे चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

