संजय राउत ने शिवसेना (यूबीटी) में संभावित बगावत की चर्चाओं के बीच बड़ा आरोप लगाया है। राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी के कुछ सांसदों को कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया है ताकि वे पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक ताकतों का समर्थन करें। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और विपक्ष तथा सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

राउत ने कहा कि उनकी पार्टी को कमजोर करने और नेताओं को तोड़ने की कोशिशें लगातार जारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें धन और सत्ता के बल पर जनप्रतिनिधियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और शिवसेना-यूबीटी के भीतर चल रही चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने भी अपने सांसदों और विधायकों से एकजुट रहने की अपील की है।
इस बीच, विपक्षी दलों ने राउत के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इन दावों को निराधार और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल और अंदरूनी असंतोष को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं। फिलहाल, संजय राउत के इस दावे ने राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।