नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 26 अगस्त को ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,700 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

इस आपदा का असर भारत पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोग संपर्क से बाहर हैं। 28 अगस्त को भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि नेपाल में 320 भारतीय नागरिक लापता या संपर्क से बाहर हैं, जबकि कई अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भी भेजी है और प्रभावित भारतीयों की जानकारी जुटाने तथा बचाव कार्यों में सहायता के लिए प्रयास तेज किए हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें और दुर्गम पहाड़ी इलाके बचाव टीमों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में भी सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों और बचाव दलों की प्राथमिकता लापता लोगों को खोजने, प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने और आगे होने वाले भूस्खलन व बाढ़ के खतरे को कम करना है।
