1.
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल (ATF) के निर्यात पर बड़ा फैसला लेते हुए डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जबकि पेट्रोल को राहत देते हुए शून्य पर ही रखा गया है।
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डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, वहीं जेट फ्यूल पर यह 29.5 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
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सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
4.
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह फैसला विंडफॉल टैक्स पॉलिसी के तहत लिया गया है, जिससे रिफाइनरी कंपनियों के मुनाफे और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
5.
एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से तेल कंपनियों को झटका लग सकता है, खासकर वे कंपनियां जो डीजल और जेट फ्यूल का बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं।
6.
पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं होने से साफ संकेत मिलता है कि देश में इसकी पर्याप्त उपलब्धता है और निर्यात पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
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सरकार का यह फैसला घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
