विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया इस समय “बेहद उथल-पुथल” के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत-आसियान सहयोग को और मजबूत करना बेहद जरूरी है। आसियान देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक संघर्षों के बीच भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को मिलकर काम करना होगा। उनका कहना था कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए आपसी सहयोग सबसे अहम है।

जयशंकर ने कहा कि भारत-आसियान सहयोग को व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में और आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” में आसियान की महत्वपूर्ण भूमिका है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों पक्षों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उनका मानना है कि इससे दोनों क्षेत्रों को आर्थिक विकास के नए अवसर मिलेंगे और साझा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा।
विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नियमित संवाद, बुनियादी ढांचा विकास, तकनीकी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाकर इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाएगा। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत-आसियान सहयोग क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सतत विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
