देश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हो रही है। याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाने के साथ-साथ देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने टिप्पणी की कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित होते हैं, तो ऐसी प्रक्रिया मनमानी और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो सकती है। उन्होंने मतदान के अधिकार को नागरिकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए इसके महत्व पर जोर दिया।
SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र नामों को हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाताओं की भी नजर है।

