देश के कई हिस्सों में मानसून की अनियमित और कमजोर बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सामान्य समय पर पर्याप्त वर्षा न होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई कई राज्यों में धीमी पड़ गई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान, मक्का, सोयाबीन, दालों और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन और बाजार में कीमतों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
कृषि मंत्रालय और मौसम विभाग लगातार मानसून की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार ने राज्यों को स्थिति की समीक्षा करने और किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में सामान्य या उससे अधिक बारिश होती है, तो बुवाई की रफ्तार में सुधार आ सकता है और नुकसान की भरपाई संभव हो सकती है।
हालांकि फिलहाल कई किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं और कृषि क्षेत्र की निगाहें पूरी तरह मानसून की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।
