सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोपी किसी विदेशी नागरिक को केवल विदेशी होने के आधार पर जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, कानून के संबंधित प्रावधान के तहत सख्त पाबंदी लागू करने के लिए यह प्रथम दृष्टया दिखाना जरूरी है कि व्यक्ति विदेशी नागरिक है और उसने भारत में प्रवेश अनधिकृत या अवैध तरीके से किया था। यह फैसला विदेशी नागरिकों से जुड़े UAPA मामलों में जमानत के कानूनी मानदंडों को स्पष्ट करता है।
यह मामला श्रीलंकाई नागरिक मोहम्मद रिफास से जुड़ा था, जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच वाले एक मामले में आरोपी बनाया गया था। केंद्र सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत रिफास को मिली जमानत बहाल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल वीजा की अवधि समाप्त होने या बाद में ठहरने की स्थिति अवैध हो जाने से यह साबित नहीं होता कि व्यक्ति ने शुरुआत में भारत में अवैध प्रवेश किया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि UAPA के तहत जमानत के नियम सख्त बने हुए हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में कानूनी शर्तों का पालन आवश्यक है। फैसला इस बात पर जोर देता है कि विदेशी नागरिकता और भारत में प्रवेश की वैधता को कानून के अनुसार अलग-अलग तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

