स्पेन एक बार फिर बड़े प्रवासी संकट का सामना कर रहा है। अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों से हजारों प्रवासी समुद्री रास्तों और उत्तरी अफ्रीका के तटों के जरिए स्पेन पहुंच रहे हैं। बेहतर रोजगार, सुरक्षित जीवन और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से पलायन कर रहे लोगों की बढ़ती संख्या ने स्पेन की शरणार्थी व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। स्पेन सरकार का कहना है कि अकेले वह इस चुनौती से नहीं निपट सकती और पूरे यूरोपीय संघ (EU) को मिलकर समाधान निकालना होगा।

इस बढ़ते संकट ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच नई राजनीतिक खाई पैदा कर दी है। इटली, ग्रीस और स्पेन जैसे सीमा वाले देश चाहते हैं कि सभी सदस्य देश प्रवासियों की जिम्मेदारी समान रूप से साझा करें, जबकि हंगरी, पोलैंड और कुछ अन्य देश अपनी सीमाओं को और सख्त करने तथा नए प्रवासियों को स्वीकार करने के खिलाफ हैं। इसी मतभेद के कारण यूरोपीय नेताओं ने आपात बैठकें बुलाई हैं, जहां सीमा सुरक्षा, शरणार्थी पुनर्वास और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर चर्चा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरोपीय संघ जल्द कोई साझा नीति नहीं बना पाया, तो यह संकट आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकता है। बढ़ती अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी के नेटवर्क और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे यूरोप की राजनीति में प्रमुख चुनावी विषय बनते जा रहे हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा के साथ-साथ युद्ध, गरीबी और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षित शरण उपलब्ध कराना भी यूरोपीय देशों की साझा जिम्मेदारी है।
