CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन तेज, नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई की तैयारी

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध मंगलवार को और तेज हो गया। INDIA ब्लॉक के कई सांसदों और नेताओं ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर नेताओं को रोकने की कोशिश की। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की मांग की। कई घंटे चले इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात को लेकर कहा कि उसे देर शाम प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध मिला था, लेकिन आयोग के मुताबिक प्रस्तावित मुलाकात का तरीका उसके प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था। इस पूरे विवाद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के उस कानून से जुड़ी याचिका पर विचार करने की बात कही है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय की गई है। बुधवार को एक याचिका में सितंबर में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के विभाजित फैसले को वापस लेने या उसमें बदलाव की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने संभावित हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत मामले की जांच करेगी और उसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। ऐसे में CEC को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर भी नजरें टिकी हैं।

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