भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब RBI ने ब्याज दर बढ़ाई है। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने इस फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। RBI ने अपनी नीति का रुख भी ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए जरूरत पड़ने पर आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
RBI का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, खाद्य महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% तक पहुंच गई थी, जबकि RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है, जिसके चलते होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसी कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। RBI के मुताबिक घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद विकास की तस्वीर फिलहाल मजबूत दिखाई दे रही है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 3% पर बरकरार रखा है और अतिरिक्त लिक्विडिटी को दूसरे उपायों के जरिए नियंत्रित करने का संकेत दिया है।

