जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार, 28 सितंबर को केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ, जबकि बीजेपी विधायकों ने विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बीजेपी ने प्रस्ताव में 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति से जुड़े संदर्भों पर आपत्ति जताई और कहा कि वह राज्यhood की बहाली के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव की भाषा स्वीकार्य नहीं है। वहीं, प्रस्ताव में कुछ सदस्यों ने अनुच्छेद 370 और 35A समेत विशेष संवैधानिक प्रावधानों को शामिल करने के लिए संशोधन भी सुझाए।
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में बांटा गया था। अब विधानसभा के प्रस्ताव के बाद राज्यhood की बहाली की मांग एक बार फिर केंद्र के सामने रखी गई है। हालांकि, विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप राज्यhood बहाल नहीं करता; इस पर केंद्र सरकार के स्तर पर आगे निर्णय होना है।

